Ancient Indian History (प्राचीन भारत का इतिहास)

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  प्राचीन भारत का इतिहास (Ancient History of India)

Ancient Indian History

इतिहास का पिता हेरोडोटस को कहा जाता है
सिंधु सभ्यता सुनियोजित शहर हेतु प्रसिद्ध थी
सिंधु सभ्यता के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि था
सिंधु वासियों का मुख्य फसल जौ और गेहूं था
सिंधु सभ्यता का सर्वाधिक पूर्वी स्थान आलमगीरपुर( मेरठ) था
सिंधु सभ्यता का सर्वाधिक पश्चिमी स्थल सुतकागेंडोर (बलूचिस्तान) था
सिंधु सभ्यता का उत्तरी स्थल मंदा (जम्मू कश्मीर) था
सिंधु सभ्यता का दक्षिणी पुरास्थल दायमाबाद( महाराष्ट्र) था
हड़प्पा सभ्यता के बारे में सबसे पहले जानकारी सन 1826 ईस्वी में चालर्स मैंसन ने दी थी
मोहनजोदड़ो एवं हड़प्पा के पुरातात्विक खुदाई के प्रभारी सर जॉन मार्शल थे
हड़प्पा सभ्यता कांस्य युगीन सभ्यता थी
सिंधु सभ्यता की लिपि चित्रात्मक थी
मिस्र के राजा फराओ कहलाते थे
खरोष्ठी लिपि दाएं से बाएं की ओर लिखी जाती थी
स्वास्तिक चिन्ह सिंधु सभ्यता की देन है
आदिमानव ने सर्वप्रथम आग जलाना सीखा था
आग का आविष्कार पुरापाषाण काल में हुआ था
कुत्ता को सबसे पहले पालतू बनाया गया
सिंधु सभ्यता आध एतिहासिक सभ्यता है|
हड़प्पा रावी नदी के तट पर अवस्थित है|
सिंधु सभ्यता का प्रमुख बंदरगाह लोथल था|
हड़प्पा के लोग लोहा से अनभिज्ञ थे|
हड़प्पा में मिट्टी के बर्तन पर लाल रंग प्रयुक्त होता था|
सिंधु सभ्यता का सर्वमान्य काल 2500 से 1750 ईसा पूर्व था|
वर्तमान में मोहनजोदड़ो पाकिस्तान में स्थित है|
मोहनजोदड़ो की खोज राखालदास ने की थी|
नर्तकी की कांस्य मूर्ति मोहनजोदड़ो से मिली है|
सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ी इमारत मोहनजोदड़ो से प्राप्त अन्नागार है|
मोहनजोदड़ो से प्राप्त प्रमुख स्मारक- विराट स्नानागार है|
मेसोपोटामिया जिसका वर्तमान नाम इराक है, का अर्थ होता है दो नदियों की बीच की भूमि|
हड़प्पा की खुदाई दयाराम साहनी के नेतृत्व में 1921 में हुई थी|
सिंधु घाटी के लोग मातृदेवी की पूजा करते थे|
पुराणों की संख्या 18 है, जिसकी रचना गुप्तकाल में हुई थी|
पुराणों के रचयिता लोमहर्ष और उग्रश्रवा थे|
उपनिषद की संख्या 108 है जिसमें 13 प्रमाणिक हैं|
पुराणों का अध्ययन करने वाला प्रथम मुसलमान अलबरूनी था|
उपनिषद दर्शन पर आधारित विषय है|
ब्राह्मण कर्मकांड से संबंधित हैं|
सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद है|
ऋग्वेद में कुल 1028 सुक्त है|
गद्य एवं पद्य वाला वेद यजुर्वेद है|
शतपत ब्राह्मण यजुर्वेद से संबंधित है|
तंत्र- मंत्र अथर्ववेद में संग्रहित हैं|
भारतीय संगीत का जनक सामवेद को कहा जाता है|
” गायत्री मंत्र” के रचनाकार विश्वामित्र के रचनाकार|
गायत्री मंत्र ऋग्वेद से लिया गया है|
गायत्री मंत्र सावित्री अर्थात सूर्य देवता को समर्पित है|
गोत्र शब्द अथर्व वेद में मिलता है|
भागवत धर्म के प्रवर्तक श्री कृष्ण थे|
भक्ति आंदोलन का प्रारंभ अलवर संतों ने किया था|
आर्यों के बारे में जानकारी ऋग्वेद से मिलती है|
ऋग्वेद में सर्वाधिक बार वर्णित नदी सिंधु है|
ऋग्वेद में वर्णित सबसे पवित्र नदी सरस्वती है|
परनीत प्रमुख देवता पुरंदर( इंद्र) है|
ऋग्वेद में सबसे बाद में निर्मित मंडल 10वां है|
ऋग्वेद का 9वा मंडल सोम समर्पित है|
” सत्यमेव जयते” मुंडकोपनिषद् से लिया गया है|
प्राचीन हिंदू विधि के लेखक मनु है|
स्मृति ग्रंथों में सबसे प्राचीन मनुस्मृति है|
‘ मिताक्षरा ‘ के लेखक विज्ञानेश्वर थे|
महाभारत का अन्य नाम जय संहिता भी है|
महाभारत के रचनाकार वेदव्यास थे|
राज्मनामा ने महाभारत को फारसी में अनुवाद किया था|
आर्यों का भारत में आगमन 1500 ईसा पूर्व से पहले हुआ था|
आर्य सबसे पहले पंजाब एवं अफगानिस्तान में बसे थे|
ऋग्वेदिक् आर्यों की भाषा संस्कृत था|
आर्य लोग भारत में मध्य एशिया से आए थे|
शून्यवाद का प्रतिपादक नागार्जुन है|

 

 

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