वैदिक संस्कृति एवं सभ्यता

वैदिक संस्कृति एवं सभ्यता

वैदिक संस्कृति एवं सभ्यता
वेद को भारत का सबसे प्राचीन धार्मिक ग्रंथ माना जाता है| वेद का संकलनकर्ता महर्षि द्वैपायन वेदव्यास ने किया था| वेद की संख्या 4 है- ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद एवं अथर्ववेद| ऋग्वेद सबसे पुराना वेद है| ऋग्वेद में मंडलों की संख्या 10 तथा सूक्तों की संख्या 1028 है| ऋग्वेद का 9वा मंडल सोम देवता को समर्पित है| दसराज्ञ युद्ध का विवरण ऋग्वेद में मिलता है जो परूषणी नदी के तट पर हुआ था| मैं कवि हूं, मेरे पिता वैद्य हैं और मेरी माता चक्की चलाती है यह कथन ऋग्वेद के नौवा मंडल में मिलता है|
चारों वेदों को संहिता कहा गया है| ऋग्वेद के पुरुष सूक्त में चार वर्णों का उल्लेख मिलता है| भारतीय संगीत का जनक सामवेद को माना जाता है| यजुर्वेद गद्य एवं पद्य दोनों में मिलता है| रोग निवारण, तंत्र मंत्र, जादू टोना, वशीकरण, विवाह, प्रेम, राजकारण, मातृभूमि आदि विविध विषयों का विवरण अथर्ववेद में मिलता है|
पुराणों के रचयिता महर्षि लोमहर्ष एवं उग्रश्रवा को माना जाता है| कुल 18 पुराण है| जिसमें सबसे पुराना पुराण मत्स्यपुराण है| स्मृति ग्रंथ को धर्मशास्त्र ग्रंथ के नाम से भी जाना जाता है| मनुस्मृति सबसे प्राचीन स्मृति ग्रंथ है| वेद, उपवेद, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद वैदिक साहित्य में सम्मिलित हैं| “सत्यमेव जयते” मुंडक उपनिषद से लिया गया है| मनुस्मृति की रचना शुंग काल में हुई थी| विष्णु पुराण में भारतवर्ष की भौगोलिक एवं मूल एकता का वर्णन मिलता है| वैदिक सभ्यता लौहयुगीन सभ्यता के अंतर्गत आता है| गायत्री मंत्र ऋग्वेद से लिया गया है| रिग वैदिक काल में 5 ऋतुओं का ज्ञान था| ऋग्वेद युग में सर्वाधिक उल्लेखित नदी सिंधु नदी जबकि सर्वाधिक सम्मानित नदी सरस्वती नदी है| इंद्र और अग्नि ऋग्वेद में सर्वाधिक सम्मानित देवता थे| ऋग्वेद में गंगा नदी का एक बार भी उल्लेख नहीं किया गया है| श्रद्धा और मनु रिग वैदिक काल में दो अमूर्त देवता थे| ऋग्वेद में बैलगाड़ी के लिए ‘अनस’ शब्द का प्रयोग किया गया है| ऋग्वेद युग में सभा एवं समिति परिषद में स्त्रियां भाग लेती थी| प्रथम और दशम ऋग्वेद का नवीनतम मंडल है| ‘असतो मा सद्गामय’ ऋग्वेद से लिया गया है| ऋग्वेद में 9वां मंडल सोम को समर्पित है| आश्रम व्यवस्था की चर्चा अथर्व वेद में है| ब्रह्मचर्य, गृहस्थ एवं वानप्रस्थ वैदिक काल के आश्रम व्यवस्था के अंतर्गत शामिल था| श्रेष्ठ या कुलीन आर्य शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है| आर्य भारत में संभवता मध्य एशिया से आए थे| पंजाब प्रांत में आर्य सर्वप्रथम आए थे| आर्य ने सबसे पहले सप्तसिंधु क्षेत्र को अपने अधिकार में लिया था| कृषि आर्यों का मुख्य पेशा था| आर्य काल के राजा को राजन के नाम से पुकारा जाता था| सिंधु आर्यों की प्रमुख नदी थी|
प्राचीन काल में आर्य हिमालय में रहते थे तथा कलांतर में हुए मे वें आर्यावर्त में आकर बस गए यह कथन स्वामी दयानंद सरस्वती कथा| मूर्ति पूजा का आरंभ पूर्व आर्य काल से माना जाता है| ऋग्वेद में ” रुद्र” शब्द का उल्लेख 3 बार मिलता है| वैदिक काल में योद्धा को सेनानी कहा जाता था| प्राचीन काल का कानून दाता मनु को माना जाता है| “आयुर्वेद” अर्थात जीवन का विज्ञान का उल्लेख अथर्व वेद में मिलता है| दर्शन की आरंभिक विचारधारक सांख्य को माना जाता है|
योग दर्शन के प्रतिपादक पतंजलि थे| वर्ण व्यवस्था का वंशानुगत जाति में परिवर्तन उत्तर वैदिक काल में हुआ था| उत्तर वैदिक काल का समय 1000 से 600 ईसा पूर्व के बीच माना जाता है| उत्तर वैदिक काल में चार वेदों की रचना की गई थी| उत्तर वैदिक कालीन समाज में ब्राह्मण वर्ण को उच्च स्थान प्राप्त था| उत्तर वैदिक कालीन धार्मिक क्रियाओं का मुख्य साधन कर्मकांड था| उपनिषदों में सबसे विशाल उपनिषद बृहदारण्यक है| कन्या का बलपूर्वक अपहरण कर उसके साथ किया गया विवाह राक्षस विवाह कहलाता था|

सिंधु घाटी सभ्यता
* सिंधु घाटी सभ्यता के विस्तार अवधि 2500-1750 ईसा पूर्व( कार्बन डेटिंग C-14 के अनुसार) हुई थी|
* सर्वप्रथम सर्वप्रथम 1921 ईस्वी में रायबहादुर दयाराम साहनी ने हड़प्पा नामक स्थान पर इसके अवशेषों की खोज की अतः इस सभ्यता का नाम हड़प्पा सभ्यता पड़ा|
* सेंधव सभ्यता का विस्तार उत्तर में पंजाब के रोपण जिले (पाकिस्तान) दक्षिण में नर्मदा घाटी तक तथा पश्चिम में बलूचिस्तान के मकरान तट से उत्तर- पश्चिम में मेरठ तक विस्तृत थी|
* इस सभ्यता की महत्वपूर्ण विशेषता नगर योजना का होना था|
* मोहनजोदरो में एक विशाल स्नानागार मिला है|
* हड़प्पा और मोहनजोदड़ो नगर सुव्यवस्थित योजना के अनुसार बनाए गए थे और यहां की आबादी काफी सघन थी सघन थी| उनकी सड़के सीधी और चौड़ी थी जो एक-दूसरे को समकोण बनाती हुई काटती थी|
* मोहनजोदड़ो का सबसे विशाल भवन अन्नागार था|
* हड़प्पा सभ्यता की मुख्य आर्थिक क्रिया कृषि थी|
* यहां के प्रमुख खाद्यान गेहूं तथा जौ थे|
* कृषि तथा पशुपालन के साथ-साथ उद्योग एवं व्यापार भी अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार थे|
* विश्व में सर्वप्रथम यहीं के निवासियों ने कपास की खेती प्रारंभ की थी| ग्रीक वासियों ने कपास को सिंडन कहा तथा इस सभ्यता को सिण्डन की सभ्यता कहा जाता है|
* समाज मातृ प्रधान था|
* मातृदेवी की उपासना सेंधव- संस्कृति में प्रमुख स्थान था|
* यहां पर पशुपतिनाथ, महादेव, लिंग, योनि, वृक्षो व् पशुओं की पूजा की जाती थी|
* सेंधव सभ्यता की लिपि भाव चित्रात्मक थी|
* इस लिपि को अब तक पढ़ा नहीं जा सका है| यह लिपि प्रथम लाइन में दाएं से बाएं तथा द्वितीय लाइन में बाएं से दाएं लिखी गई है| या लेखन कला ” ब्रुस्टोफेदन” कहलाता है|

वैदिक काल (1500-600 ई.पू.)
ऋग्वैदिक काल (1500-1000 ई. पू.)
* अनेक परिवारों को मिलाकर ग्राम बनता था, जिसका प्रधान ग्रामीण कहलाता था तथा अनेक ग्रामो को मिलाकर विश बनता था, जिसका प्रधान विश्व पति होता था|
* अनेक विशों का समूह जन या कबीला कहलाता था जिसका प्रधान राजा या गोप होता था|
* परिवार पितृ प्रधान होता था तथा वर्ण व्यवस्था कर्म पर आधारित थी|
* सोमरस आर्य का मुख्य पेय पदार्थ था एवं जौ मुख्य खाद्य पदार्थ था|
* आर्य बहुदेववादी होते हुए भी एकेश्वरवाद में विश्वास करते थे|
* देवताओं में सर्वोच्च स्थान इंद्र व उसके उपरांत अग्नि व वरुण को दिया गया था|

उत्तर वैदिक काल (1000-600 ई.पू.)
* परिवार पितृ प्रधान एवं संयुक्त परिवार था|
* जाति- प्रथा कर्म के आधार पर ना होकर जन्म के आधार पर होने लगी और उसने कठोरता आ गई| ऋग्वेद के दसवें मंडल में चार वर्णों का उल्लेख प्राप्त होता है|
* पशुपालन की अपेक्षा कृषि आर्थिक जीवन का मुख्य आधार बनी|
* लोहे का प्रयोग सर्वप्रथम इसी काल में किया गया था|
* इस समय मिट्टी के एक विशेष प्रकार के बर्तन बनाया जाते थे, जिन्हें चित्रित धूसर मृदभांड कहा जाता है|
* यज्ञ तत्कालीन संस्कृति का मूल आधार था| इसी समय उपनिषदों की रचना हुई| उपनिषद में आत्मा के अमर तत्व एवं ब्रह्म की उपासना की जाती थी|

 

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