भारत कि राज्य भाषा

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भारत की राज्य भाषा

भारत की राज्य भाषा

भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में क्षेत्रीय भाषाओं का उल्लेख है| संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित भाषाओं की संख्या 22 है| भारतीय संविधान में अनुच्छेद 343-351 तक में राजभाषा संबंधी प्रावधानों का उल्लेख है| भारत की राजभाषा हिंदी है| भारतीय संघ की आधिकारिक भाषा के रूप में संविधान द्वारा हिंदी को मान्यता प्राप्त है| संविधान के अनुच्छेद 343 (i) के तहत हिंदी में राजभाषा के रूप में दर्जा प्रदान किया गया है| किसी भाषा को किसी राज्य की भाषा के रूप में अंगीकार करने का अधिकार राज्य विधानमंडल को दिया गया है| जम्मू कश्मीर ने  उर्दू को राजकाल की भाषा के रूप में अंगीकार किया है| डोगरी भाषा जम्मू-कश्मीर राज्य में बोली जाती है| भारत के जम्मू कश्मीर राज्य में उर्दू को प्रथम राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया है| सिंधी भाषा को 21वें संविधान संशोधन के के द्वारा संविधान की आठवीं सूची में सम्मिलित किया गया है| भारतीय संविधान के अनुच्छेद 344 के अंतर्गत प्रथम राजभाषा आयोग का गठन 1953 किया गया था| 1953 में गठित राजभाषा आयोग के प्रथम अध्यक्ष वि.जी. खेर थे| संस्कृत भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है जबकि संस्कृत किसी राज्य की राजकीय भाषा है|  92वें संविधान संसोधन के द्वारा भारतीय संविधान कि आठवीं अनुसूची में बोडो, डोगरी, संथाली और मैथिली भाषा को सम्मिलित किया गया|

आपातकाल व्यवस्था

संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत अंतरराष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा राष्ट्रपति करता है| भारत के संविधान के अंतर्गत तीन प्रकार की आपातकालीन व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है- 1. राष्ट्रीय आपातकाल 2. राज्य संवैधानिक आपातकाल 3. वित्तीय आपातकाल|

राष्ट्रपति द्वारा आपातकाल की घोषणा युद्ध, बाहरी आक्रमण, सशस्त्र विद्रोह की परिस्थितियों में किया जा सकता है| बाहरी आक्रमण के आधार पर अब तक भारत में एक बार राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा राष्ट्रपति द्वारा की गई थी| देश में पहली बार राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा 26 अक्टूबर 1962 में. दूसरी आपातकाल की उद्घोषणा 3 दिसंबर 1971 में और तीसरी आपातकाल की उद्घोषणा 25 जून 1975 को राष्ट्रपति के द्वारा किया गया था| प्रथम राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के समय देश के राष्ट्रपति डॉ. एस राधाकृष्णन थे| द्वितीय राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के समय भारत के राष्ट्रपति वी वी गिरि थे| तीसरी राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के समय देश के राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद थे| तीसरी राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा राष्ट्रपति ने आंतरिक अशांति के आधार पर की थी| राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को संसद के समक्ष उसकी स्वीकृति हेतु एक माह के अंदर रखा जाना आवश्यक है| राष्ट्रीय आपातकाल में संविधान की संघीय प्रकृति यथावत बनी रहती है| संविधान के अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर राष्ट्रपति शासन लागू किया जाता है| किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा राज्य के राज्यपाल के प्रतिवेदन मिलने पर राष्ट्रपति करता है| राज्य में राष्ट्रपति शासन से तात्पर्य राज्यपाल के शासन से है| राष्ट्रपति के द्वारा राज्य में राष्ट्रपति शासन उद्घोषणा के दो माह  के भीतर संसद की स्वीकृति आवश्यक है| किसी राज्य  में राष्ट्रपति शासन की प्रारंभिक अवधि छ: माह  होती है| किसी राज्य में अधिकतम 3 वर्ष तक राष्ट्रपति शासन लागू रह सकती है| 42वें संविधान संशोधन अधिनियम 1976 के द्वारा राष्ट्रपति शासन की छः माह की अवधि को बढ़ाकर 12 माह कर दिया गया था| भारत में केरल राज्य में प्रथम बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था| प्रथम बार राष्ट्रपति शासन 20 जून 1951 को लागू किया गया था| पंजाब में अब तक सर्वाधिक लंबी अवधि तक राष्ट्रपति शासन लागू रहा| इंदिरा गांधी के शासन काल में सर्वाधिक बार राष्ट्रपति शासन की घोषणा की गई| संविधान के अनुच्छेद 360 के आधार पर राष्ट्रपति देश में वित्तीय आपात की घोषणा कर सकता है| अब तक भारत में एक बार भी वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा राष्ट्रपति के द्वारा नहीं की गई है|

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